Thursday, October 1, 2015


आज शास्त्री जी के जन्मदिन पर उन्हें नमन। हम सभी शास्त्री जी की ईमानदारी,सादगी,राष्ट्रप्रेम यही सुनकर बड़े हुए है. शायद भारतीय राजनीती का इकलौता ऐसा शख्स है जो लगभग निर्विवाद है. या यूँ कहे की जब हम भविष्य की राजनीति  की तरफ देखते है तो आदर्श राजनेता की छवि कुछ शास्त्री जी जैसी ही उभरती है. हमें इस बात पर गर्व है की ऐसा व्यक्ति हमारा प्रधानमंत्री रहा है. आज उसी देश में एक ऐसे राजनेता का उदय हुआ है जिससे बढ़िया रिश्तों की तिजारत आज तक कोई कर पाया होगा इसमें संदेह है.गरीब गुरवों के नाम की राजनीती लोग करते आये है लेकिन खुद की गरीबी बदहाली का   विद्रूप रच के सत्ता तक कैसे  पहुंचा जा सकता इस पर दुनिया भर के विपणन के पंडित हैरान है. बात यहीं तक रहती तो ठीक था अब तो विश्व गुरु बनना है तो माँ की याद तो "अमेरिकन लाला " की गोद  में ही आएगी। 
    शास्त्री जी आप हमें बहुत याद आते है.

Sunday, May 3, 2015

 उदय प्रकाश जी  *मंच *  पत्रिका के  संपादक ने इरादतन आप पर यह लेख लिखवाया  है।  यह बात गलत है. यह तो है की हमने इरादतन शिवमूर्ति पर अंक निकाला ,क्योकि हमारा ऐसा मानना  है की शिवमूर्ति प्रेमचंद की उस परंपरा के वाहक है जिसने हिंदी कथा लेखन को एक नयी  दृस्टि दी है. बतौर लेखक हम आपका बहुत सम्मान करते है. यह हो सकता है कि वैचारिक रूप से आपसे वह सहमति न हो पर आप हमारे दौर के सबसे समर्थ रचनाकार है। मैंने संजीव जी से इस विषय में बात की तो उन्होंने कहा की आपको वह लेख दोबारा पढ़ना चाहिए।उसमे ऐसा कुछ भी नहीं है जिसमे किसी तरह का दुराग्रह आपके खिलाफ हो. वह तो कमल ने एक प्रसंग में  आपका जिक्र किया है. वह प्रसंग सच है या झूठ यह तो आप और कमल बेहतर जानते होंगे.  हमारा इस जाति युद्ध से कोई लेना देना नहीं है. इस तरह व्यक्तिगत राग-द्वेष को  सार्वजानिक मंचो में लाने से साहित्य की गरिमा घटती है और तमाम ऐसे लोग पंच की भूमिका में आ जाते है जिन्हे कलम पकड़ने की  भी तमीज   नहीं है.