Sunday, May 3, 2015

 उदय प्रकाश जी  *मंच *  पत्रिका के  संपादक ने इरादतन आप पर यह लेख लिखवाया  है।  यह बात गलत है. यह तो है की हमने इरादतन शिवमूर्ति पर अंक निकाला ,क्योकि हमारा ऐसा मानना  है की शिवमूर्ति प्रेमचंद की उस परंपरा के वाहक है जिसने हिंदी कथा लेखन को एक नयी  दृस्टि दी है. बतौर लेखक हम आपका बहुत सम्मान करते है. यह हो सकता है कि वैचारिक रूप से आपसे वह सहमति न हो पर आप हमारे दौर के सबसे समर्थ रचनाकार है। मैंने संजीव जी से इस विषय में बात की तो उन्होंने कहा की आपको वह लेख दोबारा पढ़ना चाहिए।उसमे ऐसा कुछ भी नहीं है जिसमे किसी तरह का दुराग्रह आपके खिलाफ हो. वह तो कमल ने एक प्रसंग में  आपका जिक्र किया है. वह प्रसंग सच है या झूठ यह तो आप और कमल बेहतर जानते होंगे.  हमारा इस जाति युद्ध से कोई लेना देना नहीं है. इस तरह व्यक्तिगत राग-द्वेष को  सार्वजानिक मंचो में लाने से साहित्य की गरिमा घटती है और तमाम ऐसे लोग पंच की भूमिका में आ जाते है जिन्हे कलम पकड़ने की  भी तमीज   नहीं है.