Sunday, October 2, 2016

यह देश अघोषित नहीं एक घोषित युद्ध पाकिस्तान  के साथ लड़ रहा है .पठानकोट ,उरी अब 
 बारामुला . साहेब कब  तक देश की जनता को भरमाते रहोगे.जो लोग मारे जा रहे है वह इसी समाज 
के गरीब गुरवा लोग है जो रोज़ी रोटी की तलाश में नौकरी  को गए है . इनके लिए राष्ट्र का मतलब अपने 
बच्चो व परिवार की सुरक्षा है.इन्हें कही ब्यापार नहीं करना, किसी देश को एक्सपोर्ट- इम्पोर्ट करके पैसा नहीं 
कमाना  है. क्या वजह है की अब तक किसी पूँजी पति ने यह घोषणा नहीं की कि  वह पाकिस्तान से सारे 
व्यावसायिक रिश्ते ख़तम कर लेगा और वह भी सीमा में लड़ने के लिए अपना जन -धन  सब लगा देगा .
तब यह कौन लोग है जो आपके साथ आपकी सारी  विदेश यात्राओ में सरकारी ठाठ -बाठ  के साथ ब्यापार 
कर रहे है.
साहेब इस देश की जनता ने आपको इसलिए चुना है कही  लोगो को लग रहा था की सॉफ्ट- स्टेट  की छवि से हमारा बहुत नुक्सान हुआ है.अब बयान बाजी बहुत हो गई पाकिस्तान में घुसकर हमला कीजिये .पार्टी पोलटिक्स से ऊपर उठिये .राष्ट्र के खातिर एक- आध प्रदेश में सरकार बने न बने ,सर्जिकल -वर्जिकल का नगाडा बजे य न बजे .इस दीपावली में देश को पाकिस्तानी आतंकवाद  से मुक्ति   का तोहफा दीजिये .यह
बनारसी अंदाज में लड़ना बंद करिये,


Thursday, October 1, 2015


आज शास्त्री जी के जन्मदिन पर उन्हें नमन। हम सभी शास्त्री जी की ईमानदारी,सादगी,राष्ट्रप्रेम यही सुनकर बड़े हुए है. शायद भारतीय राजनीती का इकलौता ऐसा शख्स है जो लगभग निर्विवाद है. या यूँ कहे की जब हम भविष्य की राजनीति  की तरफ देखते है तो आदर्श राजनेता की छवि कुछ शास्त्री जी जैसी ही उभरती है. हमें इस बात पर गर्व है की ऐसा व्यक्ति हमारा प्रधानमंत्री रहा है. आज उसी देश में एक ऐसे राजनेता का उदय हुआ है जिससे बढ़िया रिश्तों की तिजारत आज तक कोई कर पाया होगा इसमें संदेह है.गरीब गुरवों के नाम की राजनीती लोग करते आये है लेकिन खुद की गरीबी बदहाली का   विद्रूप रच के सत्ता तक कैसे  पहुंचा जा सकता इस पर दुनिया भर के विपणन के पंडित हैरान है. बात यहीं तक रहती तो ठीक था अब तो विश्व गुरु बनना है तो माँ की याद तो "अमेरिकन लाला " की गोद  में ही आएगी। 
    शास्त्री जी आप हमें बहुत याद आते है.

Sunday, May 3, 2015

 उदय प्रकाश जी  *मंच *  पत्रिका के  संपादक ने इरादतन आप पर यह लेख लिखवाया  है।  यह बात गलत है. यह तो है की हमने इरादतन शिवमूर्ति पर अंक निकाला ,क्योकि हमारा ऐसा मानना  है की शिवमूर्ति प्रेमचंद की उस परंपरा के वाहक है जिसने हिंदी कथा लेखन को एक नयी  दृस्टि दी है. बतौर लेखक हम आपका बहुत सम्मान करते है. यह हो सकता है कि वैचारिक रूप से आपसे वह सहमति न हो पर आप हमारे दौर के सबसे समर्थ रचनाकार है। मैंने संजीव जी से इस विषय में बात की तो उन्होंने कहा की आपको वह लेख दोबारा पढ़ना चाहिए।उसमे ऐसा कुछ भी नहीं है जिसमे किसी तरह का दुराग्रह आपके खिलाफ हो. वह तो कमल ने एक प्रसंग में  आपका जिक्र किया है. वह प्रसंग सच है या झूठ यह तो आप और कमल बेहतर जानते होंगे.  हमारा इस जाति युद्ध से कोई लेना देना नहीं है. इस तरह व्यक्तिगत राग-द्वेष को  सार्वजानिक मंचो में लाने से साहित्य की गरिमा घटती है और तमाम ऐसे लोग पंच की भूमिका में आ जाते है जिन्हे कलम पकड़ने की  भी तमीज   नहीं है. 

Saturday, August 23, 2014

   केदार के शहर  बाँदा के बुद्धिजीवियों ,कला प्रेमियों तथा परिवर्तनकामी लोगो ने व्यापक वाम की अवधारणा के साथ  'शबरी ' नाम की संस्था का गठन 2007  में किया था।  यह संस्था मूलतः सांस्कृतिक छेत्र में चल रहे आंदोलनों को मंच प्रदान करने के लिए गठित हुई है।  इसी क्रम में यह संस्था प्रगतिशील आंदोलन के जनक मुंशी प्रेमचंद की स्मृति में  कथा साहित्य में 21000 रुपए का पुरस्कार अपने गठन के समय से ही देती आ रही है।
              अब तक यह पुरस्कार प्रभात रंजन,सुभाषकुश्वाहा ,दिनेश भट्ट,मोह आरिफ ,कैलाश वनवासी ,सत्यनारायण पटेल, संजीव बक्सी , नीलेश रघुवंशी व अल्पना मिश्र को दिया जा चुका  है।  इसके निर्णायक अमरकांत,शिवमूर्ति,ममता कालिया  ,कामतानाथ ,ज्ञानरंजन ,अखिलेश ,संजीव ,प्रोफ राजेंद्र कुमार ,मैत्रेयी पुष्पा,रविभूषण ,विश्वनाथ त्रिपाठी तथा विष्णु खरे रह चुके है।
 इस पुरस्कार में नामवर सिंह,मुरलीमनोहर प्रसाद सिंह ,प्रणय कृष्ण ,प्रदीप सक्सेना ,ज्ञान रंजन ,मंगलेश डबराल,वीरेंद्र यादव जैसे हिंदी के शीर्ष हस्ताक्षर अपने वक्तव्य दे चुके है. यह पुरस्कार बाँदा शहर की जनता अपनी छोटी व अल्प बचत के सहयोग से करती है।  इस पुरस्कार में किसी तरह का सरकारी व संस्थागत सहयोग नहीं लिया जाता है।
          वर्ष 2015  के लिए यह पुरस्कार मदन मोहन के "उपन्यास जहाँ एक जंगल था " के लिए दिया जाता है है. यह उपन्यास पूर्वी उत्तर प्रदेश के तराई वाले हिस्से को अपनी कथा भूमि बनाता है जिसमे मध्यवर्गीय चरित्र के नैतिक ,सांस्कृतिक व राजनैतिकअंतर्द्वंद   दर्ज किये गए है.राजनैतिक  संगठन के आभाव में अपनी दिशा तलाश कर रहे आक्रोश का चित्रण इस उपन्यास को विशेष बनाता है.
                  वर्ष 2016  का सम्मान वरिष्ठ कथाकार संजीव के उपन्यास' फाँस ' के लिए दिया जाता है . फाँस के माध्यम से संजीव ने विदर्भ के किसानों की आत्महत्या से जुड़े बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के दुष्चक्र व पूंजीवादी सरकारों के मकड़जाल को भली भांति उजागर किया है.


                                                                                                                 मयंक खरे
                                                                                                              सचिव -शबरी
                                                                                                            A -56  इंदिरा नगर
                                                                                                           बाँदा 210001
                                                                                                    मोबाइल -9450169406

Sunday, August 10, 2014

बाँदा १०/०८/२०१४  हिंदी की प्रतिष्ठित कथाकार  अल्पना मिश्रा को ८ प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान 2014  के लिए उनके उपन्यास "अनिहारे तलछट में चमका " के लिए प्रदान किया जाता है . इस पुरस्कार के निर्णायक विश्वनाथ त्रिपाठी, शिवमूर्ति व डॉ चन्द्रकला त्रिपाठी थी . इस पुरस्कार की राशि rs . 21000  है . इसके पूर्व यह पुरस्कार प्रभातरंजन ,सुभाष कुशवाहा , दिनेश भट्ट , मोह आरिफ , कैलाश वनवासी , सत्य नारायण पटेल , संजीव बक्सी  व नीलेश रघुवंशी  को दिया जा चुका है . यह पुरस्कार अक्टूबर माह में बाँदा में दिया जायेगा . 

Saturday, January 11, 2014

 बाँदा के बुद्धिजीवियों  कलाप्रेमियों ने वर्ष २००७ में प्रेमचंद कि स्मृति में कथा सम्मान का आरम्भ किया था . इसमें अबतक पुरस्कार लेने वालो में प्रभात रंजन ,सुभाष कुशवाहा ,दिनेश भट्ट ,मो आरिफ , कैलाश वनवासी , व सत्यनारायण  पटेल थे निर्णायक मंडल में श्री अमरकांत ,शिवमूर्ति ,नमिता सिंह ,प्रोफ राजेंद्र कुमार ,कामतानाथ ,ममता कालिया ,अखिलेश ,ज्ञानरंजन ,विष्णु खरे जैसे वरिष्ठ लोग रह चुके है .
  यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रेमचंद कि स्मृति में बाँदा से दिया जाता है . इस पुरस्कार कि राशि rs  21000  है .      
       इस वर्ष यह सम्मान श्री संजीव बक्सी  को उनके उपन्यास "भूलन कांदा " के लिए दिया जा रहा है . इस वर्ष के निर्णायक विष्णु खरे व शिवमूर्ति थे .
                                                                                               संयोजक
                                                                                        मयंक खरे 

Sunday, December 18, 2011

प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान

पाँचवा प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान इस वर्ष प्रसिद्ध कथाकार श्री सत्यनारायण पटेल को उनके कहानी संग्रह लाल छीट वाली लुगड़ी के सपने के लिए दिया गया है. इसके निर्णायक श्री ज्ञान रंजन,विश्वनाथ त्रिपाठी,रविभूषण थे, श्री रविभूषण ने अपना नाम नैतिक कारणों से वापस ले लिया था.क्योकि उनके भतीजे की भी प्रविष्टी इस सम्मान हेतु आई थी.शेष दोनों निर्णयको ने एकमत से श्री सत्यनारायण पटेल के नाम की संस्तुति की थी.वरिष्ठ कथाकार व पहल के संपादक श्री ज्ञान रंजन ने अपने निर्णय में कहा की प्रेमचंद की कहानियो के बाद बदलते आँचल और ग्रामीण  परिवेश का प्रमाणिक चित्रण रेणु,मार्कंडेय,अमरकांत,से होता हुआ शिवमूर्ति,हरनोट तक तो पंहुचा पर उसके बाद उसका आगामी छोर  अचानक लुप्त हुआ.इस छोर  को जीवंत करने उसकी नई खोज करने के लिए सत्यनारायण अपनी परिवर्तनकामी रचनाशीलता में सक्रिय है. वे हमें ताजा,मौलिक तरह से आश्वस्त कर रहे है.
                                      यह सम्मान बांदा के कलाप्रेमियो द्वारा गठित शबरी नाम की संस्था द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है.इसके पूर्व यह सम्मान श्री प्रभात रंजन, सुभाष कुशवाहा, दिनेश भट्ट,मोह्हम्मद आरिफ,कैलाश वनवासी को दिया जा चूका है.जिसके निर्णायक श्री अमरकांत,नमिता सिंह,शिवमूर्ति,प्रोफ राजेन्द्रकुमार,कामतानाथ,संजीव,अखिलेश,मैत्रेयि पुष्पा,ममता कालिया रह चुकी है. इस सम्मान की पुरस्कार  १५००० रूपया है. इस वर्ष यह सम्मान २६ जनवरी को बांदा में दिया जायेगा.जिसके मुख्यअतिथि प्रखर आलोचक व सम्मानित कवि श्री विष्णु खरे के द्वारा दिया जायेगा.इस कार्यक्रम में श्री ज्ञान रंजन, विश्वनाथ त्रिपाठी,रविभूषण ,विनोद कुमार शुक्ल,शिवमूर्ति,वीरेन्द्र यादव,संजीव के आने की सम्भावना है. यह जानकारी शबरी के सचिव मयंक खरे ने दी.